भूकंप अचानक आ जाता है, इसलिए पहले से कुछ बेसिक प्लान बनाना ज़रूरी है. अगर आप भारत में रहते हैं तो अपने घर या ऑफिस की स्ट्रक्चर को थोड़ा‑बहुत चेक कर लें। दरवाज़े‑खिड़कियों के फिक्सिंग ठीक हों और भारी चीजें नीचे रखी हों, ताकि धक्का लगते ही गिर न जाएँ.
एक छोटा एमरजेंसी किट बनाइए – फ़्लैशलाइट, बैटरियां, प्राथमिक चिकित्सा सामान और कुछ पानी रखिए. परिवार के साथ मिलकर एक मीटिंग पॉइंट तय कर लें, जैसे पड़ोसी का बड़ा पेड़ या स्कूल का मैदान. रोज़ थोड़ा‑बहुत इस प्लान को रिव्यू करें; अगर कोई नई चीज़ सीखते हैं तो तुरंत जोड़ें.
घर की दीवारों पर एंटी‑सेसमिक स्ट्रिप लगवाना फायदेमंद रहता है, लेकिन खर्चा ज्यादा नहीं होना चाहिए. यदि आप किराए के घर में रहते हैं तो मकान मालिक से इस बात को चर्चा में लाएँ. अक्सर छोटे‑छोटे सुधार जैसे शेल्फ़ की हिंगे टाइट करना भी बड़ा असर देता है.
जैसे ही झटके महसूस हों, तुरंत ड्रॉप, कवर, और होल्ड ऑन का नियम अपनाएँ. जमीन पर बैठें, सिर को किसी मजबूत चीज़ से ढँकें, जैसे मेज़ या कुर्सी की पैर। अगर आप बाहर हैं तो खुली जगह में भागें, बिल्डिंग, ट्री या लाइट पोस्ट के नीचे नहीं.
एलेवेटर कभी भी इस्तेमाल न करें; सीढ़ियां ही सबसे सुरक्षित रास्ता हैं. यदि आपके पास पेटेंटेड सिस्मिक अलार्म है, तो उसकी आवाज़ सुनते ही तुरंत कदम उठाएँ. मोबाइल से चेक‑इन करना भूलें नहीं – अपने रिश्तेदारों को बताइए आप ठीक हैं.
भूकंप के बाद धुआँ या गैस की लीक का खतरा रहता है. अगर गंध आती है तो फायर एक्स्टिंग्विशर ले कर तुरंत बाहर निकलें, दरवाज़ा बंद करके। पानी और बिजली कटौती भी हो सकती है; इसलिए टॉर्च और बैटरी वाला रेडियो handy रखें.
जाँच‑पड़ताल में घर की दीवारों में दरार या फर्श के झुकाव पर ध्यान दें. छोटी‑छोटी क्षति को जल्दी ठीक कर लें, नहीं तो बाद में बड़ी समस्या बन सकती है. अगर बिल्डिंग सुरक्षित नहीं लगती तो तुरंत बाहर निकलें और स्थानीय अधिकारी से संपर्क करें.
समुदाय स्तर पर भी तैयारी ज़रूरी है। पड़ोसियों के साथ मिलकर एक आपदा समिति बनाएँ, जहां हर कोई अपने‑अपने जिम्मेवारियाँ जानता हो. राहत सामग्री जैसे रोटी, दाल, चावल का स्टॉक रखें और जरूरत पड़ने पर साझा करें.
भूकंप से जुड़ी खबरों को फॉलो करते रहें; सरकारी अलर्ट या मौसम विभाग की वेबसाइट्स अक्सर अपडेट देती हैं। अगर किसी क्षेत्र में रेगुलर एक्टिविटी है तो रीयल‑टाइम मैप देखें, इससे आप पहले से ही चेतावनी पा सकते हैं.
अंत में, याद रखें कि डर के आगे कार्रवाई नहीं चलती. छोटी‑छोटी तैयारी आपका और आपके परिवार का जीवन बचा सकती है. इसलिए आज ही एक चेक‑लिस्ट बनाइए, उसे अपने मोबाइल पर सेव करें और हर महीने रिव्यू करें – यही सबसे आसान तरीका है सुरक्षित रहने का.
उत्तराखंड में 6.7 आयाम के भूकंप के अभ्यास के बीच तीसरा भूकंप आया, जिसने राज्य की तैयारी को बेहतर बनाया। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि यहां 600 साल पहले के बाद एक विनाशकारी भूकंप आने का खतरा है।
और देखेंदक्षिणी जापान के तट पर गुरुवार को 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिससे सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप का केंद्र क्यूशू के पूर्वी तट के पास लगभग 30 किलोमीटर गहराई पर था। पीड़ित क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने और ऊंचाई वाली जगह पर जाने की सलाह दी गई है।
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