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मार्च,2026
बुधवार सुबह ही स्कूलों और परिवारों में एक सकारात्मक ठहराव महसूस किया गया जब मध्य प्रदेश सरकार ने अपने सभी स्कूली छात्रों के लिए वर्ष 2026 का परिणाम घोषित कर दिया। राज्य स्तर पर आयोजित इस परीक्षा में लगभग 24 लाख बच्चों ने हिस्सा लिया था, लेकिन जो रिजल्ट आया है वह किसी धमाके से कम नहीं है। उदय प्रताप सिंह, विद्यालयी शिक्षा मंत्री of मध्य प्रदेश ने गुरुवार को स्वयं इसका खुलासा किया और कहा कि यह आंकड़े शिक्षा विभाग की मेहनत का नतीजा हैं। परिणाम 25 मार्च 2026 को दोपहर में ऑफिशियल पोर्टल के जरिए उपलब्ध कराया गया था।
ये आंकड़े सिर्फ अंकों का ढेर नहीं हैं, बल्कि इनमें एक बड़ी कहानी छिपी है। कक्षा पाँचवीं में कुल छात्रों में से 95.14% ने परीक्षा उत्तीर्ण होने में सफलता हासिल की। वहीं, कक्षा आठवीं का यह प्रतिशत 93.83% रहा है। यदि हम पिछले साल के आंकड़ों की बात करें, तो यह साइजेबल इम्प्रूवमेंट यानी तीन प्रतिशत तक की वृद्धि दर्शाता है। ट्विस्ट यह है कि लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों की अपेक्षा बेहतर रहा। मध्य प्रदेश के स्कूलों में अब लड़कियां सीढ़ियों पर चढ़ रही हैं। कक्षा पाँचवीं में 6,19,868 लड़के पास हुए जबकि 6,18,012 लड़कियों में से 5,94,476 ने पास किया। इसका मतलब लड़कों की 94.15% और लड़कियों की 96.19% संतोषजनक दर है। कक्षा आठवीं में भी यह पैटर्न दिखाई दिया। 5,32,408 लड़कियों में से 5,05,667 पास हुईं और लड़कों में 92.74% की सफलता दर रही। यह दिखता है कि शिक्षा में लिंग समानता अब एक वास्तविकता बन चुकी है।
जब बात जिलों की करती है, तो नक्शे पर कुछ नाम सबसे ऊपर हैं। कक्षा आठवीं के लिए नरसिंहपुर जिला ने शीर्ष स्थान पर कब्जा करते हुए 99.38% की पास दर दर्ज की। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है क्योंकि यह लगभग सभी छात्रों के पास करने को दर्शाता है। इसके बाद डिंढोरी (98.74%), बालाघाट (98.71%), झाबुआ (98.40%) और अलीराजपुर (98.09%) जैसे जिले टॉप फाइवर में आए। इन जिलों के शिक्षकों और प्राथमिकियों ने इसे लेकर खुशी जाहिर की है। राज्या शिक्षा केंद्र द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में ये क्षेत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे हैं। हालांकि, अन्य जिलों में भी औसत से ऊपर का प्रदर्शन देखा गया, जिससे statewide गुणात्मक शिक्षा का दबे हो रहा है। यह साबित करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
अगर आपका बच्चा या आपके परिचित का बच्चा इसी परीक्षा में शामिल हुआ है, तो उनके नतीजे चेक करना अब बहुत आसान हो गया है। आपको बस इंटरनेट का उपयोग करना है। वेबसाइट rskmp.in पर जाएं और 'रेजल्ट' पेज चुनें। वहां आप अपना रोल नंबर या समग्र आईडी (Samagra ID) डाल सकते हैं। कैप्चा कोड भरने के बाद ही परिणाम स्क्रीन पर आ जाएगा। प्राइवेटी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और टीचर्स के लिए भी यह पोर्टल ओपन है। वे जिलेवार और स्कूलवार रिपोर्ट भी डाउनलोड कर सकते हैं। यह सुविधा इसलिए दी गई है ताकि कोई भी बच्चा अपनी प्रोग्रेस को ट्रैक कर सके। कई बार बिजली कट जाने या नेटवर्क की समस्याएं आ सकती हैं, इसलिए शाम के समय चेक करने से बचें।
मंत्री जी ने बताया कि यह परिणाम केवल नंबर नहीं है बल्कि भविष्य की नींव है। कक्षा 5 और 8 की परीक्षाएं 'अनुप्रयोग परीक्षाएं' (Proficiency Examinations) कहलाई जाती हैं। ये तब आयोजित होती हैं जब बच्चे मध्य विद्यालय या उच्चतर शिक्षा में जाने की तैयारी करते हैं। परिणाम घोषणाभोपाल के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी और निजी दोनों ही स्कूलों में बच्चों ने अच्छा किया है। विभाग का मानना है कि अब अधिक बच्चे स्कूल छोड़ने से पहले उच्च शिक्षा के अवसर पाने में सक्षम होंगे। आंकड़े बताते हैं कि पिछले सालों की तुलना में इस बार एग्जाम का सिलेबस थोड़ा बदला हुआ था, फिर भी छात्रों ने उसे पूरा किया। यह टीम वर्क का ही फल है कि इतने बड़े स्तर पर इतनी तेजी से परिणाम जारी हो सका।
परिणाम चेक करने के लिए आपको या तो रोल नंबर या फिर Samagra ID की आवश्यकता होगी। वेबसाइट rskmp.in पर दिए गए फॉर्म में जानकारी भरकर कैप्चा सॉल्व करने पर रजिस्टर होगा। अगर कोई जानकारी मिलती नहीं है तो स्कूल प्रशासन से संपर्क करें।
नरसिंहपुर जिले में कक्षा आठवीं के लिए 99.38% की सर्वाधिक पास दर रही है। इसके बाद डिंढोरी और बालाघाट जिले दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। इन क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों का योगदान काफी प्रमुख रहा है।
दोनों वर्गों में लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया। कक्षा पांचवीं में लड़कियों की पास दर 96.19% और लड़कों की 94.15% रही। कक्षा आठवीं में भी महिलाओं का अनुपात 94.98% के रूप में दर्ज किया गया है।
आमतौर पर रिजल्ट में गलती बहुत कम होती है। यदि कोई टेक्निकल समस्या सामने आए, तो सीधे अपने स्कूल के प्रधानाचार्य या संबंधित जिले के शिक्षा अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। वेबसाइट पर किसी भी तरह की शिकायत फार्म की सुविधा मौजूद है।
इस तरह के आंकड़े देखकर मन को एक प्रकार की शांति मिलती है क्योंकि यह दर्शाता है कि मेहनत केवल शब्द नहीं बल्कि व्यवहारिक रूप में बदली है।
मुझे लगता है कि इसमें शिक्षकों का हाथ बहुत है जिसने अपने बच्चों को सही दिशा दी।
परिणाम का यह स्तर किसी धमाके से कम नहीं है जो राज्य भर में फैला हुआ है।
यदि हम इसकी गहराई से बात करें तो यह सिर्फ अंकों का खेल नहीं रहा।
मुझे आशा है कि यह ट्रेंड आगे भी बना रहेगा।
सुबह सुबह अच्छी खबर मिली बच्चों को खुशी होनी चाहिए उनकी मेहनत रंग लाई है
इसमें सबको शामिल किया गया था कोई छोटी नहीं रही इसमें भाग लेने वाली टीम ने बहुत काम दिया है मैं खुश हूं कि आंकड़े इतने ऊपर पहुंचे
ये सभी बच्चे मेरे दिल के करीब हैं और उनके लिए यह जीत बहुत बड़ी है
आगे भी ऐसे ही चलते रहना चाहिए ताकि हर घर में शिक्षा का दीप जले