उत्तराखंड में 6.7 आयाम के भूकंप के अभ्यास के बीच तीसरा भूकंप, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी 14 दिस॰,2025

रात के एक बजे, जब पूरा उत्तराखंड सो रहा था, तभी एक अनुकृत भूकंप ने रुद्रप्रयाग के तहत राज्य भर में तूफान खड़ा कर दिया। एक नकली भूकंप जिसकी तीव्रता 6.7 आयाम थी, उसके अभ्यास में कोटेश्वर जिला अस्पताल ढह गया, सुमेरपुर रेलवे टनल में 40-50 कामगार फंस गए, और सड़कें भूस्खलन से बंद हो गईं। यह सिर्फ एक अभ्यास नहीं था — यह एक चेतावनी थी, जो उत्तराखंड के भूगर्भ में छिपे खतरे को दर्शाती थी। और वह खतरा अभी भी जीवित है।

भूकंप के बाद भूकंप: उत्तराखंड का अशांत भूगर्भ

अभ्यास के दिन ही, दोपहर 4:45 बजे, एक वास्तविक भूकंप ने चमोली जिले के नीचे धमाका किया — 4.7 आयाम का, 33 किमी गहराई पर। यह तीसरा भूकंप था जो सिर्फ एक हफ्ते में उत्तराखंड को हिला दिया। पिछले दिन, 6 दिसंबर को, रुद्रप्रयाग के नीचे 5.5 आयाम का भूकंप आया था, जिसे दिल्ली-एनसीआर तक महसूस किया गया। और उससे एक दिन पहले, 5 दिसंबर को, 3.3 आयाम का एक और झटका आया।

इनके बीच, 7 दिसंबर को ही एक और 4.2 आयाम का भूकंप रिकॉर्ड किया गया, और 9 दिसंबर को एक और 4.2 आयाम का झटका हल्दवानी से 168 किमी उत्तर-पूर्व में आया। नवंबर के अंत में, अल्मोड़ा के पास 3.7 आयाम का भूकंप आया था। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं — ये एक पैटर्न हैं।

क्या हुआ अभ्यास में?

रुद्रप्रयाग के जिला प्रशासन ने इस अभ्यास को 'रिएक्टर लेवल' पर तैयार किया — यानी ऐसा जैसे भूकंप असली हो गया हो। नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), पुलिस, स्वास्थ्य दल और स्थानीय प्रशासन ने एक साथ काम किया। कोटेश्वर अस्पताल के ढहे हुए हिस्सों में से लोगों को बाहर निकालने के लिए रोबोटिक डिटेक्शन टूल्स इस्तेमाल किए गए। सुमेरपुर टनल में फंसे लोगों के लिए ऑक्सीजन और खाने की आपूर्ति की जा रही थी — जैसे असली में होता है।

डिस्ट्रिक्ट एमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर ने सभी एक्शन्स को रियल-टाइम मॉनिटर किया। एक टीम ने अगस्तमुनि मार्केट में नुकसान का आकलन किया, जहां दुकानें ढह गईं और बच्चे घायल हुए। ये सब तब हुआ जब बाहर एक असली भूकंप ने चमोली को हिला दिया था।

वैज्ञानिकों की चेतावनी: 600 साल का तूफान आ रहा है

इन सब घटनाओं से पहले, नवंबर 2025 में हिमालय में आपदा सहनशील बुनियादी ढांचे पर एक राष्ट्रीय वर्कशॉप हुआ था। वहां के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कहा — उत्तराखंड, जो केंद्रीय भूकंपीय रिक्ति में स्थित है, एक विनाशकारी भूकंप के लिए तैयार है।

अंतिम बड़ा भूकंप यहां 600 साल पहले आया था। उसके बाद से, भूगर्भ में दबा हुआ ऊर्जा इकट्ठा हो रही है। वैज्ञानिकों ने कहा — इस रिक्ति में 7.5 से 8.0 आयाम तक का भूकंप आ सकता है। और जब वह आएगा, तो न सिर्फ घर, बल्कि सड़कें, पुल, बिजली के तार और अस्पताल भी नष्ट हो जाएंगे।

194 भूकंप, 10 साल में: एक आंकड़ा जो डराता है

पिछले 10 सालों में, उत्तराखंड के 300 किमी के आसपास 194 भूकंप 4 आयाम या उससे अधिक के आए हैं। यानी लगभग हर 19 दिन में एक भूकंप। ये कोई साधारण आंकड़ा नहीं है — ये एक नियमित तालिका है जो बताती है कि भूगर्भ अशांत है।

1905 में, देहरादून से 274 किमी उत्तर-उत्तर-पश्चिम में 7.9 आयाम का भूकंप आया था — यह अभी तक का सबसे भयानक भूकंप रहा है। उसके बाद से, यहां के लोगों ने भूकंप के बारे में भूलने की कोशिश की। लेकिन भूगर्भ नहीं भूलता।

क्या किया जा रहा है?

अभ्यास के बाद, राज्य सरकार ने कहा कि वे हिमालयी क्षेत्रों के लिए नए निर्माण मानक बनाएंगे। अब नए घरों को ढलान पर बनाने के लिए खास तकनीकों की जरूरत होगी। बुनियादी ढांचे — अस्पताल, स्कूल, सड़कें — को भूकंप-सहनशील बनाने का निर्देश दिया गया है।

लेकिन यहां की एक बड़ी समस्या है — अधिकांश निर्माण अवैध हैं। घरों को बिना नियमों के बनाया जा रहा है। अगर अगला भूकंप आ गया, तो ये घर नहीं, लोग ढह जाएंगे।

अगला कदम क्या है?

12 दिसंबर, 2025 तक, कोई बड़ा भूकंप नहीं आया। लेकिन यह शांति का संकेत नहीं है — यह बादलों के बीच की चुप्पी है। वैज्ञानिक अब भूकंपीय गतिविधि को 24x7 मॉनिटर कर रहे हैं। राज्य सरकार ने गांवों में भूकंप अभ्यास के लिए टीमें तैनात की हैं। बच्चों को स्कूलों में भूकंप के दौरान क्या करना है, उसकी शिक्षा दी जा रही है।

लेकिन सबसे बड़ी चुनौती है — लोगों को डर से नहीं, तैयारी से समझाना है। अगर हम इस भूकंप को अभ्यास के रूप में देखेंगे, तो अगला भूकंप हमारे लिए आपदा नहीं, बल्कि जीवन बचाने का अवसर बन सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में भूकंप क्यों अधिक आते हैं?

उत्तराखंड हिमालय के तहत इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव के कारण भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। इस क्षेत्र को 'केंद्रीय भूकंपीय रिक्ति' कहा जाता है, जहां लगभग 600 साल पहले एक विनाशकारी भूकंप आया था। इस अवधि के बाद भूगर्भ में ऊर्जा इकट्ठी हो रही है, जिसका असर छोटे-छोटे भूकंपों के रूप में दिख रहा है।

अभ्यास में कौन-कौन से संगठन शामिल थे?

राज्य भर के अभ्यास में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग शामिल थे। इन संगठनों ने एक साथ अस्पतालों, टनलों और बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाए। इनकी समन्वय व्यवस्था डिस्ट्रिक्ट एमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर ने नियंत्रित की।

अगला बड़ा भूकंप कब आ सकता है?

वैज्ञानिकों के अनुसार, अगला बड़ा भूकंप किसी भी समय आ सकता है — यह भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। लेकिन इतिहास के आधार पर, जब तक 600 साल की अवधि पूरी नहीं हो जाती, तब तक खतरा बना रहता है। अभी तक के आंकड़े दर्शाते हैं कि एक बड़ा भूकंप आने में कम से कम 50-100 साल बाकी हैं।

सामान्य नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए क्या कर सकते हैं?

घरों को भूकंप-सहनशील बनाना, बच्चों को भूकंप अभ्यास से रूबरू कराना, और आपातकालीन बैग (जल, दवाएं, फ्लैशलाइट, रेडियो) तैयार रखना जरूरी है। अगर भूकंप आए, तो खिड़कियों के पास न रुकें, दरवाजों के नीचे छिपें, और अस्पताल या स्कूल के निर्माण मानकों को जांचें। बेहतर निर्माण ही जान बचाता है।

क्या रुद्रप्रयाग में भूकंप के लिए विशेष जोखिम है?

हां। रुद्रप्रयाग केंद्रीय भूकंपीय रिक्ति के दक्षिणी छोर पर स्थित है, जहां भूगर्भीय तनाव अधिक है। इस क्षेत्र में 2025 में ही दो बड़े भूकंप आए — 5.5 आयाम और 6.7 आयाम के अभ्यास के लिए अनुमानित केंद्र। यहां के ढलानों पर बने घर और सड़कें विनाश के लिए तैयार हैं।

भूकंप के बाद बचाव कार्य में क्या बाधाएं आती हैं?

सड़कों के भूस्खलन, बिजली और संचार व्यवस्था का नष्ट होना, और अस्पतालों का नुकसान बचाव कार्य को बाधित करता है। अक्सर गांवों तक पहुंचने में देरी होती है। इसलिए अभ्यास में ड्रोन और हेलीकॉप्टर का उपयोग अहम रहा — ये वहीं जाते हैं जहां इंसान नहीं पहुंच सकते।

टिप्पणि
Arjun Kumar
Arjun Kumar 14 दिस॰ 2025

अरे यार ये सब अभ्यास है ना तो फिर इतना डर क्यों? असली भूकंप तो आएगा तभी पता चलेगा कि क्या होता है। अभी तो सिर्फ राज्य सरकार का धमाकेबाजी वाला प्रचार है।

RAJA SONAR
RAJA SONAR 16 दिस॰ 2025

600 साल का तूफान आ रहा है यार बस इतना ही काफी है अभी तक के छोटे झटके तो बस भूगर्भ का हल्का सा खास निकास है जब तक तुम लोग अपने घरों में नहीं बैठे तब तक तो ये बातें बस बातों का खेल है

Mukesh Kumar
Mukesh Kumar 16 दिस॰ 2025

ये अभ्यास बहुत अच्छा लगा बस इतना कहूं कि हम सब एक साथ तैयार हो जाएं अगर ये भूकंप आए तो जान बचाने के लिए बच्चों को सिखाएं और अपने घरों को मजबूत बनाएं ये डर नहीं बल्कि जागरूकता है

Shraddhaa Dwivedi
Shraddhaa Dwivedi 17 दिस॰ 2025

मैं उत्तराखंड की एक बूढ़ी दादी के घर गई थी जिसने कहा था कि जब जमीन हिलती है तो चारों ओर की आवाजें बदल जाती हैं ये भूकंप नहीं बल्कि प्रकृति की सांस है जिसे हम भूल गए हैं

Govind Vishwakarma
Govind Vishwakarma 19 दिस॰ 2025

194 भूकंप 10 साल में ये आंकड़ा बिल्कुल गलत है ये सिर्फ उन्हीं के रिकॉर्ड हैं जिन्होंने अपने घर में टीवी चलाया था बाकी सब बस नाटक है

Jamal Baksh
Jamal Baksh 20 दिस॰ 2025

हमारी संस्कृति में प्रकृति का सम्मान हमेशा से रहा है और आज के इस अभ्यास में भी वही भावना दिख रही है जब लोग एक साथ आए और अपने जीवन की रक्षा के लिए तैयार हुए यही सच्ची शक्ति है

Shankar Kathir
Shankar Kathir 22 दिस॰ 2025

मैं एक भूवैज्ञानिक हूं और मैंने इस क्षेत्र को 15 साल से देखा है ये छोटे झटके बिल्कुल सामान्य हैं लेकिन जब तक आप लोग अपने घरों को बिना नियमों के बनाते रहेंगे तब तक कोई अभ्यास भी काम नहीं करेगा असली खतरा भूगर्भ में नहीं बल्कि हमारी लापरवाही में है

Bhoopendra Dandotiya
Bhoopendra Dandotiya 22 दिस॰ 2025

ये भूकंप तो बस एक भाषा है जिसे प्रकृति बोल रही है जैसे कोई बूढ़ा आदमी अपनी गलतियों का इजहार कर रहा हो अब तक हमने उसकी बात नहीं सुनी अब वो थोड़ा जोर से बोल रही है

Firoz Shaikh
Firoz Shaikh 23 दिस॰ 2025

इस अभ्यास के दौरान निर्माण मानकों के लागू होने की आवश्यकता है और यह आवश्यकता न केवल राज्य सरकार के लिए बल्कि हर नागरिक के लिए भी है जिसका घर भूकंप प्रतिरोधी नहीं है वह अपने आप को खतरे में डाल रहा है

Saileswar Mahakud
Saileswar Mahakud 24 दिस॰ 2025

मैंने रुद्रप्रयाग में एक दोस्त को देखा जो अपने बच्चे को भूकंप अभ्यास में शामिल करा रहा था उसने कहा कि अगर बच्चा जान ले कि अपने आप को कैसे बचाना है तो वो अपने परिवार को भी बचा सकता है ये बहुत बड़ी बात है

Rakesh Pandey
Rakesh Pandey 25 दिस॰ 2025

क्या हम इतने डरे हुए हैं कि एक अभ्यास को असली भूकंप समझ रहे हैं अगर ये इतना खतरनाक है तो सरकार क्यों नहीं लोगों को बाहर निकाल रही

aneet dhoka
aneet dhoka 27 दिस॰ 2025

ये सब अभ्यास तो सिर्फ एक चाल है असली भूकंप तो एक दिन आएगा और तब पता चलेगा कि ये सब अमेरिकी एजेंट्स का षड्यंत्र था जो हमारे भूगर्भ को तोड़ने के लिए बनाया गया है

Harsh Gujarathi
Harsh Gujarathi 27 दिस॰ 2025

अभ्यास बहुत अच्छा लगा 🙏 अब बस ये जागरूकता बनी रहे और हम सब एक दूसरे की मदद करें जीवन बचाना है तो डरने की जगह तैयार हो जाएं 😊

Senthil Kumar
Senthil Kumar 29 दिस॰ 2025

बच्चों को सिखाओ नहीं तो फिर क्या होगा बस ये ही काफी है

Shankar Kathir
Shankar Kathir 30 दिस॰ 2025

सेंथिल के कमेंट पर जवाब देते हुए मैं कहूंगा कि बच्चों को सिखाना तो बहुत अच्छी बात है लेकिन अगर उनके घर असुरक्षित हैं तो उनकी शिक्षा का क्या फायदा बच्चा जान ले कि दरवाजे के नीचे छिपना है लेकिन अगर छत उस पर गिर जाए तो वो भी बच नहीं पाएगा

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