हर साल लाखों विद्यार्थी सरकारी या निजी परीक्षा देते हैं। लेकिन साथ में कुछ लोग इस सिस्टम को फेक करने की कोशिश करते हैं। यह सिर्फ एक छोटा झंझट नहीं, बल्कि पूरी पढ़ाई का नुकसान और भविष्य पर असर डालता है। तो चलिए समझते हैं कि धांधली कैसे होती है और हम क्या कदम उठा सकते हैं।
सबसे पहले देखें कि लोग किन-किन रास्तों से धोखा देते हैं। अक्सर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में नकली दस्तावेज़, परीक्षा पेपर की लीक या रिजल्ट बदलना देखा जाता है। उदाहरण के तौर पर UGC NET 2025 में कई उम्मीदवार ने कहा कि उनके स्कोर को बिना कारण बदला गया। वहीँ JEE Main 2025 के परिणाम लिंक में तकनीकी गड़बड़ी से छात्रों को देर तक इंतजार करना पड़ा। ऐसे मामलों में अक्सर सोशल मीडिया या फेक वेबसाइटों पर झूठी जानकारी फैलती है।
धांधली करने वालों के खिलाफ कानून कड़ा है। परिचालन अधिनियम 2020 और विभिन्न राज्य के शिक्षा विभागों ने फर्जी दस्तावेज़ बनाकर परीक्षा देने पर सजा का प्रावधान किया है। आप भी इनसे बच सकते हैं अगर आप कुछ आसान कदम अपनाएँ:
इन छोटे‑छोटे कदमों से आप न केवल अपना डेटा सुरक्षित रखेंगे बल्कि धांधली वालों को भी रोक पाएँगे। अगर आपको लगता है कि आपके साथ धोखा हुआ है तो तुरंत संबंधित परीक्षा बोर्ड या स्थानीय पुलिस में FIR दर्ज करवाएँ। कई बार सरकारी पोर्टल पर शिकायत करने का विकल्प रहता है, जहाँ आपका केस तेज़ी से निपटाया जाता है।
धांधली को रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता भी जरूरी है। आप अपने दोस्तों और सहपाठियों को सही जानकारी दे सकते हैं, ताकि कोई फेक न्यूज में फँसे नहीं। जब सब मिलकर सतर्क रहेंगे तो परीक्षा प्रणाली मजबूत होगी और आपका भविष्य सुरक्षित रहेगा।
अंत में यही कहूँगा—कोई भी छोटा‑छोटा शंका या अनियमितता को नजरअंदाज न करें। सही स्रोतों से जानकारी लें, समय पर कार्रवाई करें और अपने सपनों की पढ़ाई में फोकस रखें। परीक्षा धांधली का सामना हम सब मिलकर कर सकते हैं, बस जागरूक रहना है जरूरी।
नीट पेपर लीक मामले में मास्टरमाइंड अमित आनंद ने कबूल किया कि परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्न पत्र को लीक किया गया था। यह घटना 4 मई को हुई, जब 5 मई को नीट की परीक्षा होनी थी। आनंद ने बताया कि छात्रों को प्रश्न पत्र और उत्तर दिए गए थे, जो उन्होंने रातभर में याद किए। इसके बदले प्रत्येक छात्र ने 30-32 लाख रुपये चुकाए।
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