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मार्च,2026
सुबह की शुरुआत ही राहत भरी हुई थी ग्राहकों के लिए। 26 मार्च 2026 को देश भर में पेट्रोल और डीजल के भाव बिना किसी बदलाव के रहे, जबकि दुनिया भर में तेल के मूल्यों में उछाल का डर बना हुआ था। पश्चिम एशिया में राजनीतिक तनाव बावजूद, तीन प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों ने दामों को स्थिर रखने का फैसला लिया। सुबह के 6 बजे जारी हुए रेट्स बताते हैं कि सरकार और तेल कंपनियों ने आम जनता को अचानक आर्थिक झटका देने से बचाने की कोशिश की है।
मूल्य स्थिरता के पीछे का कारण क्या है?
बाजार की गहराई में झांकने पर पता चलता है कि सिर्फ खरीदारी का फैसला यहाँ तक सीमित नहीं है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) जैसे नियोक्ताओं ने वॉलेटाइलिटी को सोख लिया है। स्रोतों के अनुसार, 2022 के मई के बाद से टैक्स कटौती और नियंत्रण के चक्र के तहत मूल्य अपरिवर्तित हैं। वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग $90 प्रति बैरल के आसपास घूम रही हैं, लेकिन भारतीय बाजार इससे थोड़ा अलग व्यवहार कर रहा है।
यहाँ बात यह है कि यदि इन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय दरों के हिसाब से तुरंत बढ़ोतरी कर दी होती, तो मुद्रास्फीति पर काबू पाना मुश्किल हो जाता। इसलिए, वे एक तरफ मार्केटिंग लागत को संतुलित कर रहे हैं और दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
विभिन्न शहरों में दामों का मानचित्र दर्शाता है कि कैसे स्थानीय टैक्स नीतियों का असर दिखता है। दिल्ली जहां सबसे कम शुल्क वाला शहर है, वहीं मुंबई जैसे महानगरों में रेट काफी ऊँचे हैं।
ध्यान दें कि ज्यादातर प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के बंधन को पार कर चुकी है, जबकि डीजल अभी उस सीमा के नीचे बना हुआ है। चंडीगढ़ जैसे शहरों में डीजल की दर ₹82.45 के आसपास है, जो कि राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
लेकिन रुकिए, सब कुछ स्थिर नहीं है। हालिया समाचारों में एक मोड़ आया है—हाई-ऑक्टेन पेट्रोलiant वर्ग पर। कंपनियों ने खास फ्यूलों जैसे XP95 और Power Petrol की कीमतों में लगभग ₹2 से ₹2.3 की वृद्धि कर दी है। यह वह छोटा विवरण है जिसे अक्सर छूट दे दिया जाता है। कुछ पंपों पर अब आईओसी का XP95 ₹101.80 प्रति लीटर के आसपास बेचा जा रहा है। इसे महंगाई के रूप में देखना चाहिए या फिर सर्विस क्वालिटी की समझदारी? पुराने ड्राइवर इसे अपनी गाड़ियों की इंजिन लाइफ के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि आम लोग इसे भार मानते हैं।
राज्य के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगले कुछ समय तक रिटेल मूल्य स्थिर रहेंगे। यह फैसला मुद्रास्फीति को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियाँ अक्सर अप्रत्याशित होती हैं। अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है, तो तेल कंपनियां फिर से अपनी लाभ मार्जिन पर ध्यान दे सकती हैं। इसके विपरीत, अगर संघर्ष बढ़ता है, तो हम फिर से कीमतों के अस्थायी रुझान देख सकते हैं।
व्यापार विशेषज्ञों का मत है कि अब तक की स्थिरता सरकारी नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने पांच साल के दृष्टिकोण से देखा है कि कैसे भारत ने ऊर्जा मूल्यों को वैश्विक चक्र से कुछ हद तक अलग रखा है। इसका मतलब यह नहीं कि भविष्य में कोई परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि यह कि अचानक होने वाले झटकों की आशंका कम है।
फिलहाल तो नहीं। भले ही वैश्विक तेल के मूल्य $90 प्रति बैरल के आसपास हैं, भारत में तेल कंपनियों ने अस्थिरता को स्वयं सोख लिया है। अधिकारियों का अनुमान है कि अल्प अवधि में दाम स्थिर रहेंगे ताकि मुद्रास्फीति पर कंट्रॉल बना रहे।
26 मार्च 2026 को होसरहाबाद में पेट्रोल की कीमत सबसे अधिक ₹107.46 प्रति लीटर थी। इसके बाद पुणे और मुंबई जैसे महानगर紧随其后 हैं। यह अंतर मुख्य रूप से स्टेट टैक्स और परिवहन लागत के कारण होता है।
नहीं, खासकर हाई-ऑक्टेन पेट्रोल में बढ़ोतरी देखने को मिली है। भारतीय तेल निगम के XP95 में लगभग ₹2 से ₹2.3 की वृद्धि हुई है। अब यह कई स्टेशनों पर ₹101.80 प्रति लीटर के आसपास उपलब्ध है, जो सामान्य पेट्रोल से थोड़ा अधिक है।
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